शुरु से ही बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों का बोलवाला रहा है।लग रहा है कि यह परंपरा एक कदम और बढ़ने वाला है।बिहार NDA के घटक दलों के बीच 2019 जीतने को लेकर फॉर्मूला तय हो गया है।बीजेपी और जदयू 16-16 सीटों पर जबकि सहयोगी पार्टीयां लोजपा 6 और रालोसपा 2 सीटों पर लड़ेंगी 2019 का चुनावी दंगल। हालांकि 2014 के मुकाबले 2019 का चुनाव जीतना NDA के लिए आसान नहीं होगा। नेताबिहीन विपक्ष थोड़े समय के लिए हमलावर होकर असहज हो जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण बिहार में फिलहाल नीतीश के कद के बराबर कोई दूसरा नेता नहीं।बिहार को विकास के पटरी पर लाने के बाद समाज सुधार के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किये हैं।दहेजबंदी और शराबबंदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।शराबबंदी से एक नए शराबमाफिया वर्ग का उदय हुआ है। लेकिन समाज के निचले पैदान पर रहने वाले लोगों के घरों में आर्थिक खुशहाली आई है।बिहारवासियों को जगंलराज्य की भयावता से ऊबर में लंबा समय लगेगा।जमीनीस्तर पर बिहार की जनता मानती है कि जबतक बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहेंगे तबतक बिहार में बहार रहेगा।
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Showing posts from October, 2018
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बिहार की राजनीति में सबकुछ सामान्य होता नहीं दिख रहा।एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर घमासान जारी है। कोई भी दल छोटे भाई की भूमिका निभाना नहीं चाह रहा।आने-वाले समय में इसकी कीमत बिहार की जनता को ही चुकानी पड़ेगी।हालांकि जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कहा है कि एनडीए में सीटों का बंटवारा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस बात की घोषणा एनडीए के बड़े नेता करेंगे। एनडीए में नीतीश की वापसी से रालोसपा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा कई बार अपने इस दर्द को व्यक्त भी कर चुके है। रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए को कुछ समय पहले नजर झुका कर सीना भी दिखा चुके हैं।लेकिन कोई भाव नहीं दिए जाने से थोड़े नरम पड़े है।और उपयुक्त मौके की ताक में है कि कब उनका सियासी खीर अपना रंग दिखाए। इधर मीडिया में सीट बंटवारे की अटकलों को लेकर लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सिरे से नकार दिया है।औऱ कहा है कि सीटों के बंटवारे पर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।लेकिन मीडिया में सीटों का बंटवारा भी हो चुका है,यह उनकी समझ से पड़े है।यह आने वाला समय ही त...
बिहार की सियासत में नीतीश- सुशील मोदी की जोड़ी
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बिहार की सियासत में नीतीश- सुशील मोदी की जोड़ी फ्लिमी किरदार जय-वीरू से कम नहीं।छात्र राजनीति से उपजे दोनों नेता ने आपसी समन्वय से बिहार में विकास का राजमार्ग दुरूसत किया है।एक समय देश में बिहार को लेकर अलग-अलग धारणा थी।कोई बिहार को बिमारू राज्य बोलता था।जबकि बिहार को जंगल राज्य की संज्ञा देने वालों की भी कोई कमी नहीं थी। लेकिन नीतीश-मोदी की जोड़ी ने इस मिथक को तोड़ा।औऱ साबित कर दिखाया कि बिहार भी विकास की पटरी पर तेज दौड़ सकता है।आज बिहार तेजी से विकास करने वाले राज्यों में शुमार है।आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बिहार ने अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल किया है।सड़कें दो से चार और चार से छह लेन की बन रही हैं। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है। IIT,IIIT,IIM,NIFT सहित केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं।नि : संदेह आज राष्ट्रीय राजनीति परिदृश्य में नीतीश- मोदी की जोड़ी समाजवादी विचारधारा के प्रतिबिंब बनके उभरे हैं।
इशारा साफ है...साहब
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इशारा साफ है...साहब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सियोल पीस प्राइज 2018 के लिए चुना गया है. यह सम्मान अतंरराष्टीय़ सहयोग, ग्लोबल आर्थिक प्रगति और भारत के लोगों के मानव विकास को तेज करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाने पर दिया जा रहा है. सियोल पीस प्राइज कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन ने इसकी घोषणा की. हाल ही में पीएम मोदी को मिला था 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' बीते दिनों प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा पर्यावरण सम्मान भी दिया गया. मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति को संयुक्त रूप से 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवॉर्ड से सम्मानित किया. अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के नेतृत्व और 2022 तक भारत को एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक से मुक्त कराने के संकल्प को लेकर उन्हें यह सम्मान दिया गया.
जब तक लोग आपका मूल्य समझ पाएंगे आप पहले से ज्यादा मूल्यवान हो चुके होंगे...
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जब तक लोग आपका मूल्य समझ पाएंगे आप पहले से ज्यादा मूल्यवान हो चुके होंगे... इसे अनुपम खेर साहब ने TWEET किया है।यह लाइन अपने आप में एक दर्शन है।खासकर उन लोगों के लिए जो जीवन में थोड़ी-थोड़ी परेशानियों से घबड़ा जाते हैं।घबड़ाता तो में भी हूं । लेकिन हर बार इससे थोड़ा मजबूत होकर उबड़ता हूं । आज महानवमी है।मैं आज बिल्कुल अकेला हूं।अगर कुछ मेरे साथ हैं तो सिर्फ और सिर्फ मेरी कल्पनाएं हैं...जिनके सहारे जीने की कोशिश करता हूं...और खुश रहता हूं। हालांकि जब से थोड़ा चलने फिरने में असहज हो गया,तबसे सार्वजनिकता से दूर रहने की कोशिश करने लगा...इस कारण मेरा कहीं आना-जाना बेहद कम हो गया।आज भी कुछ पढ़ने के लिए नया नहीं था। इसलिए आज के पेपर को ही कई बार पढ़ा।इसी दौरान अनुपम खेर के इस tweet पर नजर पड़ा। जीवन से परेशान रहने वाले लोग।जो थोड़ी-थोड़ी परेशानियों से घबड़ा जाते हैं।टूट जाते हैं।हताशा और निराशा से भरी जिंदगी उन्हें बोझिल सी लगने लगती है।इससे तंगहार कर कुछ ऐसा कर जाते हैं ,जिसकी भरपाई संभव नहीं हो पाता है ।औऱ कोई कर भी नहीं पाता।परिस्थितियों से जुझना औऱ मजबूति के साथ उबड़ना ही बेहत...
पुलिस के कारनामें बोलते हैं.....
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पुलिस के कारनामें बोलते हैं..... सन् 2002 में एक फिल्म आई थी। उस फिल्म का नाम था-दूल्हे राजा।इस फिल्म में एक गाना था ...अपने दीवाने का कर दे बुरा हाल रे कि आंखियों से गोली मारे।कुछ हद तक फिल्म की बात तो समझ में आती है ।फिल्म में कुछ भी हो सकता है। यूपी नायक-नायिका आंख से गोली मार कर ही एक दूसरे को घायल कर सकते हैं। इसका दिल जीत सकता है,लेकिन थोड़ा कल्पना कीजिए।क्या वास्तविक जीवन में ऐसा हो सकता है ? थोड़े समय के लिए आप असहज हो सकते है,लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे की पूलिस ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है। आंख से तो नहीं मुंह से गोली मार कर अपराधी को पकड़ लिया।सोशल मीडिया पर यह कारनामें तेजी से फैल रहा है।कानून व्यवस्था के बनाएं रखने के नाम पर एनकाउटर का रिकॉड बना कर ही दम लेगी।यह सियासत का मामला है।इसके कारण कई बार यूपी पूलिस की धज्जी भी उड़ चुका है। ऐसा ही एनकाउटर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।दारोगा जी लाख कोशिश करते रहे।लेकिन पिस्टल से गोली नहीं चली।फिर साहब ने मुंह से ही ठॉय-ठॉय कर गोली चला दीं।अपराधी भी कम अहिंसक नहीं निकला।दारोगा जी का सम्मान करते हुए पक...
लोकतंत्र में संख्या बल का महत्व है.अगर हम होते तो गूंज हमारी भी सुनाई पड़ती...
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थावरचंद गेहलोत साहब सुनों हमारी.... थावरचंद गेहलोत साहब केन्द्र सरकार में सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री हैं.जैसा कि मंत्रालय के नाम से ही स्पष्ट है कि ये साहब लाचार और असहाय लोगों के सशक्तिकरण का बीड़ा अपने कंधों पर ढोह रहे हैं.पहली बार साहब को सुनने का मौका मिला.इसलिए सभी ज्ञानचक्षुओं को मैंने पहले ही साफ-सुथरा कर कर खोल रखा था. अवसर था सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग की ओर से दिव्यांगजनों के लिए कैंप का उद्घाटन का.एक पल तो ऐसा लगा कि गेहलोत साहब ने भी फेंकने में PHD कर रखा है.उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से विकलांग समझ उपेक्षा नहीं की जा सकती.इसका सीधा-सीधा अर्थ निकलता है कि साहब भी स्वीकार कर रहे हैं कि विकलांग जन उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं.आपने तो साहब बिल्कुल दुखती नब्ज पर हाथ रख दिया. आंख में धूल झोकने का खेल ही तो हो रहा है,नहीं तो हम भी आदमी काम के थें अब तक सशक्तिकरण के नाम पर तुष्टिकरण ही हुआ है.समानभूति की जगह सहानभूति ही मिला... अगर अवसर मिलता तो कई लोग एवरेस्ट फतह कर जाते.आप बोल रहे हैं कि विकलांग जन को सुविधा मिले तो वो अपनी काबीलियत साबित कर सकते हैं,साह...
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बिहार की राजनीति में खास पहचान बनाने वाले इस बाहुबली सांसद का नाम तो है राजेश रंजन,लेकिन क्षेत्र में इनकीर पहचान है पप्पू यादव के नाम से. पहली बार 1990 में निर्दलीय विधायक बनकर बिहार विधानसभा पहुंचे.इसके बाद शुरु हुआ इनका बिहार की राजनीति का सफर . लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था.उनका सियासी सफर विवादों से भरा रहा.किसी फिल्म की तरह मारधाड़ और एक्शन से भरपूर.उस समय के बड़े-बड़े दबंग भी पप्पू से टकराने में अपनी भलाई नहीं समझते थे. पप्पू यादव मधेपुरा के सिंघेश्वरस्थान विधानसभा की स ीट से पहली बार विधायक बनें.धीरे-धीरे कोसी बेल्ट के कई जिलों में अपना प्रभाव बढ़ा लिया.इसके साथ ही उन्होंने मधेपुरा नहीं बल्कि पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, कटिहार जिलों में अपने समर्थकों का मजबूत नेटवर्क खड़ा कर लिया. वर्तमान में बिहार के मधेपुरा से सांसद और जन अधिकार पार्टी के संरक्षक हैं राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव.लेकिन अब वो उनकी छवि क्षेत्र में एक बाहूबली की हुआ करती थी.उस मिथक को तोड़ते हुए नजर आ रहे है. आज के समय में पप्पू यादव एक जनप्रिय नेता के रुप में उभर रहे है. बड़ी मुखरता से अपनी बात रखते हैं.और स...
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अपलक देखता अपनी ही हथेलियों को, लगाता बरबाद लम्हों का हिसाब-किताब और गहरी हो गईं लकीरे तुम्हारे याद की तरह । रेत पर रखता हूँ हथेलियां, निशान छोड़ जाती हैं । बिल्कुल वैसे,जिस तरह तुम्हारे जाते कदमों को देखकर आँखों के कोर पर पसरे थे निशान । मैं आज भी वही खड़ा हूँ जहाँ से लौटते वक़्त तुमने पलटना नही समझ मुनासिब । मेरा इंतजार भी लकीरों की तरह बस गहरा हो रहा ।
किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं : SC
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किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं : SC 157 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. इसके साथ ही आज सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार की वैधता को रद्द करते हुए कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं.अगर उसमें अपराध जैसा कुछ नही हो तब . पांच जजों की संविधान प ीठ ने व्यभिचार कानून को असंवैधानिक बताया. आईपीसी की धारा 497 को संविधान पीठ ने अवैध घोषित करते हुए कहा कि व्यभिचार अपराध नहीं. अगर व्यभिचार अपराध बनेगा तो इसका मतलब दुखी लोगों को सजा देना होगा. व्यभिचार के साथ अगर कोई अपराध न हो तो इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चीन, जापान, ब्राजील में ये अपराध की श्रेणी में नहीं आता. इस कानून सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा अगर अविवाहित पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ सैक्स करता है तो वह व्यभिचार नहीं होता. कोर्ट ने कहा कि शादी की पवित्रता बना...
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मंडराने लगा बिहार में राकपा के वजूद पर खतरे का बादल.... राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सांसद और पार्टी महासचिव तारिक अनवर के इस्तीफे के बाद बिहार में राकपा के वजूद पर खतरे ही खतरे का बादल का मंडराने लगा है. तारिक अनवर के इस्तीफे के बाद अब बिहार में कोई भी जनप्रतिनिधि राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का नहीं रहा. तारिक अनवर की छवि पूरे सीमांचल में एक धर्मनिरपेक्ष और लोकप्रिय नेता की है. तारिक अनवर के पिता भी बिहार विधानसभा के सदस्य रह चूके थे, जबकि उनके दादा बिहार के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थे. मोदी लहर में भी कटिहार के अपने संसदीय सीट को बचाने में रहे थे सफल... राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के टिकट पर तारिक अनवर ने वर्ष 2014 का लोकसभा का चुनाव कटिहार के संसदीय सीट से लड़े थे. उनके विरोध में भाजपा से निखिल चौधरी और जदयू से डॉ. राम प्रकाश महतो लड़े थे. घर वापसी के कयास लगाएं जा रहे हैं राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सांसद और पार्टी महासचिव तारिक अनवर के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस में उनके घर वापसी के कयास लगाएं जा रहे हैं.ऐसा इस कारण से की तारिक अनवर कांग्रेस से चार बार सांसद रह चूके हैं. तारिक ...
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बस इतना समझिए की राफेल डील बोर्फोस-2 मात्र है... भाजपा का सबका साथ और सबका विकास का नारा पूरे पांच सालों में समझ नहीं आया,उसी तरह कांग्रेस का राफेल पर विरोध .... शायद जितना महत्वपूर्ण चुनाव के समय बोर्फोस भाजपा के लिए होता है शायद उतना ही महत्वपूर्ण अब राफेल कांग्रेस के लिए हो गया है.बोर्फोस से कुछ याद आया आपको ? चुंकी बोर्फोस, कांग्रेस,चुनाव और राजीव गांधी ये सभी कड़ी आपस में जुड़े हुए हैं.आज तक जिस तरह से बोर्फोस मामले की सच्चाई जनता के सामने नहीं आ सकी,कुछ इसी तरह लगता है कि राफेल का भी होने वाला है.ऐसा मालूम पड़ता है. नेताओं को अपनी जिम्मेदारी का एहसास भले ही न हो,लेकिन बोर्फोस ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है.कारगिल युद्ध के समय बोर्फोस ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए.और कारगिल जीत कर भारत का सितारा बुलंद किया. हालांकि बोर्फोस सौदे के समय तात्कालिन प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही थीं.इसी कारण विपक्ष उन्हीं की छवि को टारगेट कर उनकी मिस्टर क्लीन की छवि को धूमिल करने का भरसक प्रयास किया.ये और बात है कि राजीव गांधी अब हमारे बीच नह...
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क्या वाकई में देश बदल रहा है..... समय का संयोग देखिए !एक तरफ जहां नारी शक्ति की उपासना का महानपर्व शारदीय मनाया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ अबला समझने जाने वाली भारतीय नारियों ने पुरूष की भोगवादी मानसिकता के विरुध जंग छेड़ रखा है.रोज-रोज नए खुलासे हो रहे हैं.जो लोग कभी नारी सम्मान और गरिमा की बात करते थे,वो नारी शोषण का सिर-मोड़ बनकर उभर रहे हैं. विडबंना देखिए जिस समय यह हो रहा है,देश शारदीय नवरात्रा की धूम में लीन है.पूरा का पूरा देश नारी शक्ति का ही उपासना कर रहा है.लेकिन यहा ं जरा ठहरिए और सोचिए आखिर यह शक्ति है क्या ? कुछ लोग कहते हैं कि साहसपूर्ण ढंग से जीवन जीने की कला को ही शक्ति कहा जाता है.कुछ अर्थों में देखें तो उनका यह मत सही भी लगता है.लेकिन इसके उलट शक्ति का एक कुरूप चेहरा भी है जो सद्चरित्रता का लिबास ओढ़े आस-पास ही होता है.वो हमारे मित्र,मेंटर या बॉस के रुप में हो सकता है. देश में शुरु हुए इस मीटू कैंपेन को एक सकारात्मक पहल के रुप में देखा जाना चाहिए.देर से ही सही भारतीय नारी शोषण के विरुध अपनी आवाज को बुलंद करने लगी है.हालांकि महिलाओं के इस पहल को पुरुषवादी मानसिकता वाले...
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परिवार में बढ़ते कलह के बीच तेजस्वी मिलने पहुंचे लालू से.... तेजस्वी पिता लालू प्रसाद से मिलने रांची के रिम्स अस्पताल पहुंचे.दोनों ने बंद कमरे में काफी देर तक बातचीत की.बताया जा रहा है कि पार्टी में तेजस्वी यादव के बढ़ते कद से उनके बड़े भाई तेजप्रताप और बहन मीसा भारती नाराज चल रही हैं. लेकिन उन्होंने सारी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि परिवार में किसी तरह की कोई दरार की बात नही है.इसके साथ ही उन्होंने महागठबंधन में भी किसी तरह की टूट की बात को सिरे से खारिज किया. और कहा कि दोनों के बीच लगभग आधे घंटे तक मुलाकात हुई जिसमें शीट शेयरिंग को लेकर चर्चा की गई. दरअसल ,जानकारों की बात मानें तो लालू यादव परिवार में चल रहे वर्चस्व की लड़ाई से काफी नाराज हैं. इसलिए उन्होंने दोनों भाईयों के बीच जिम्म्दारियों को बंटवारा कर दिया है. एक ओर जहां तेजप्रताप को संगठन की गतिविधियों को चलाने और अलग-अलग विंग को मजबूत करने की जिम्मेवारी दी वहीं दूसरी ओर छोटे बेटे को पार्टी की चुनावी रणनीति का जिम्मा देखेने को कहा. लालू यादव ने कहा है कि पार्टी तेजस्वी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी .इसके साथ ही शीट...
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखण्ड के दो जिलों में 'सुजलाम सुफलाम अभियान को पायलट परियोजना के तौर पर लागू करने की संभावनाओं पर गहन अध्ययन करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र में जल समस्या के समाधान के लिए सरकार, राजनीतिक संगठनों, स्वयंसेवी संगठनों तथा जनसहभागिता से चलाए जा रहे 'सुजलाम सुफलाम अभियान पर प्रस्तुतिकरण देखा। महाराष्ट्र में यह अभियान सूखा प्रभावित जिलों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की मदद से सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है।
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शिवसेना ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनता है तो भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया जाएगा।शिवसेना ने कहा कि भगवान राम भाजपा के लिए ‘अच्छे दिन’ ले आए लेकिन अयोध्या में मंदिर बनवाने का अपना वादा पूरा करने में विफल रही। संसद में बहुमत होने के बावजूद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में ‘विलंब’ के लिए भाजपा पर निशाना साधा।
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हम श्रम नायक हैं भारत के और मेधा के अवतारी हैं कवि शंभूशिखर ने शायद सही ही लिखा है.लेकिन गुजरात में बिहार और यूपी के लोगों के साथ जो मार-पीट किया जा रहा है,वो निंदनीय है.इस घटना के पीछे गुजरात के कांग्रेसी विधायक अल्पेश ठाकोर और उसकी तथाकथित ठाकोर सेना की भूमिका जगजाहिर हो चुकी है. ठाकोर सेना के द्वारा आठ अक्टूबर तक बिहार और यूपी के लोगों से गुजरात छोड़ने को कहा गया.इस धमकी के कारण हजारों गरीब और दिहाड़ी मजदुरी करने वाले लोग अपने-अपने गृह प्रदेश वापस लौट रहे हैं.इस खबर को कई मीडिया घरानाओं के द्वारा प्रमुखता से दिखाया जा रहा है. इस संबंध में बिहार और यूपी के मुख्यमंत्री ने गुजरात के अपने समकक्ष से बात-चीत कर लोगों के जान-माल की सुरक्षा को कहा है. गौरतलब है कि अभी जिस गुजरात में ये सब हो रहा है .वहां के सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा भी एक बिहारी के हाथों में ही है.इन सबके बीच सवाल उठता है कि क्या उन्हें भी.....? सीमित संसाधनों के बावजूद बिहार और यूपी के लोगों ने हर क्षेत्र में अपना डंका अपनी मेहनत और लगन से बजाया है.शासन-प्रशासन,राजनीति,शिक्षा या पत्रकारिता को ही ले लीजिए...ऊपर...