जब तक लोग आपका मूल्य समझ पाएंगे आप पहले से ज्यादा मूल्यवान हो चुके होंगे...


जब तक लोग आपका मूल्य समझ पाएंगे आप पहले से ज्यादा मूल्यवान हो चुके होंगे...
इसे अनुपम खेर साहब ने TWEET किया है।यह लाइन अपने आप में एक दर्शन है।खासकर उन लोगों के लिए जो जीवन में थोड़ी-थोड़ी परेशानियों से घबड़ा जाते हैं।घबड़ाता तो में भी हूं । लेकिन हर बार इससे थोड़ा मजबूत होकर उबड़ता हूं ।
आज महानवमी है।मैं आज बिल्कुल अकेला हूं।अगर कुछ मेरे साथ हैं तो सिर्फ और सिर्फ मेरी कल्पनाएं हैं...जिनके सहारे जीने की कोशिश करता हूं...और खुश रहता हूं।
हालांकि जब से थोड़ा चलने फिरने में असहज हो गया,तबसे सार्वजनिकता से दूर रहने की कोशिश करने लगा...इस कारण मेरा कहीं आना-जाना बेहद कम हो गया।आज भी कुछ पढ़ने के लिए नया नहीं था। इसलिए आज के पेपर को ही कई बार पढ़ा।इसी दौरान अनुपम खेर के इस tweet पर नजर पड़ा।
जीवन से परेशान रहने वाले लोग।जो थोड़ी-थोड़ी परेशानियों से घबड़ा जाते हैं।टूट जाते हैं।हताशा और निराशा से भरी जिंदगी उन्हें बोझिल सी लगने लगती है।इससे तंगहार कर कुछ ऐसा कर जाते हैं ,जिसकी भरपाई संभव नहीं हो पाता है ।औऱ कोई कर भी नहीं पाता।परिस्थितियों से जुझना औऱ मजबूति के साथ उबड़ना ही बेहतर होता है।रात कितनी घनी क्यूं न हो सबेरा होना निश्चित है।उसी प्रकार समय चाहे जितना भी प्रतिकूल हो।उसका हारना भी निश्चित है।
अनुपम खेर साहब बहुमुखी प्रतिभा के इंसान हैं... एक अच्छे अभिनेता,बेहतरीन वक्ता होने के साथ-साथ एक उम्दा लेखक। इनकी किताब कुछ भी हो सकता है मुझे बेहद पसंद है...हो सके तो आप इस TWEET पर मंथन कर कुछ भी विचार जो आपके मन में आ रहा हो उसे FEEDBACK में जरूर दीजिएगा।




                     

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