बस इतना समझिए की राफेल डील बोर्फोस-2 मात्र है...
भाजपा का सबका साथ और सबका विकास का नारा पूरे पांच सालों में समझ नहीं आया,उसी तरह कांग्रेस का राफेल पर विरोध ....
शायद जितना महत्वपूर्ण चुनाव के समय बोर्फोस भाजपा के लिए होता है शायद उतना ही महत्वपूर्ण अब राफेल कांग्रेस के लिए हो गया है.बोर्फोस से कुछ याद आया आपको ? चुंकी बोर्फोस, कांग्रेस,चुनाव और राजीव गांधी ये सभी कड़ी आपस में जुड़े हुए हैं.आज तक जिस तरह से बोर्फोस मामले की सच्चाई जनता के सामने नहीं आ सकी,कुछ इसी तरह लगता है कि राफेल का भी होने वाला है.ऐसा मालूम पड़ता है.
नेताओं को अपनी जिम्मेदारी का एहसास भले ही न हो,लेकिन बोर्फोस ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है.कारगिल युद्ध के समय बोर्फोस ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए.और कारगिल जीत कर भारत का सितारा बुलंद किया.
हालांकि बोर्फोस सौदे के समय तात्कालिन प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही थीं.इसी कारण विपक्ष उन्हीं की छवि को टारगेट कर उनकी मिस्टर क्लीन की छवि को धूमिल करने का भरसक प्रयास किया.ये और बात है कि राजीव गांधी अब हमारे बीच नहीं हैं ,लेकिन बोर्फोस का जीन अब भी जिन्दा है.जिसे चुनावों के समय महसूस कियी जा सकता है.
कुछ इसी तरह का मामला राफेल का भी है.आज राफेल भारत की जरुरत है.विशेषकर चीन के संदर्भ में.....यूपीए-2 में लाख कोशिशों के बावजूद फ्रांस भारत को राफेल देने के लिए राजी नहीं हुआ.लेकिन ज्योंहि भाजपा की पूरे बहुमत की सरकार केन्द्र में आई तो फ्रांस के सुर बदल गए.
इसके बाद अपने बदले सुर में फ्रांस ने भारत के साथ राफेल की डील पक्की की.साथ ही भारत में राफेल मेक इन इंडिया के अंर्तगत बनाने को राजी भी हुआ.
जहां तक कांग्रेस का सवाल है मेक इन इंडिया की अवधारणा को नकारना उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता है.यो सिर्फ राजनीतिक मुद्दे हैं जिनका इस्तेमाल दोनों पार्टियां प्रोपगेंडा फैलाने के लिए कर रही हैं
बस समझिए यह उसी तरह है कि एक साख पर बैठे दो कौए एक दूजे से बोल रहे हो कि---तू काला तो तू काला

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