हम श्रम नायक हैं भारत के
और मेधा के अवतारी हैं 
कवि शंभूशिखर ने शायद सही ही लिखा है.लेकिन गुजरात में बिहार और यूपी के लोगों के साथ जो मार-पीट किया जा रहा है,वो निंदनीय है.इस घटना के पीछे गुजरात के कांग्रेसी विधायक अल्पेश ठाकोर और उसकी तथाकथित ठाकोर सेना की भूमिका जगजाहिर हो चुकी है.
ठाकोर सेना के द्वारा आठ अक्टूबर तक बिहार और यूपी के लोगों से गुजरात छोड़ने को कहा गया.इस धमकी के कारण हजारों गरीब और दिहाड़ी मजदुरी करने वाले लोग अपने-अपने गृह प्रदेश वापस लौट रहे हैं.इस खबर को कई मीडिया घरानाओं के द्वारा प्रमुखता से दिखाया जा रहा है. इस संबंध में बिहार और यूपी के मुख्यमंत्री ने गुजरात के अपने समकक्ष से बात-चीत कर लोगों के जान-माल की सुरक्षा को कहा है.
गौरतलब है कि अभी जिस गुजरात में ये सब हो रहा है .वहां के सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा भी एक बिहारी के हाथों में ही है.इन सबके बीच सवाल उठता है कि क्या उन्हें भी.....?
सीमित संसाधनों के बावजूद बिहार और यूपी के लोगों ने हर क्षेत्र में अपना डंका अपनी मेहनत और लगन से बजाया है.शासन-प्रशासन,राजनीति,शिक्षा या पत्रकारिता को ही ले लीजिए...ऊपर से नीचे तक बिहारी ही मिलेंगे.
यह सच है कि बिहार और यूपी या बोलें तो पूरा का पूरा पूर्वांचल उधमशीलता के मामले में थोड़ा पिछड़ा हुआ है.लेकिन यह भी कठोर सत्य है कि हेराफेरी में फिसड्डी हैं.व्यापार करने में थोड़े हिचकते हैं.जब बात देश सेवा कि हो तो मातृभुमि पर अपना शीश चढ़ाने और दुश्मन का शीश काटने से भी पीछे नहीं हटते.अगर भ्रम हो तो शहीदों का इतिहास उठा कर पढ़ लें.
इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए की अपराध का सर्मथन किया जा रहा.जो सच है वो सच रही रहेगा.जिसने भी अपराध किया उसे कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए. इसके लिए बहुसंख्यक समाज को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता.
इस पूरे प्रकरण पर राहुल गांधी का रवैया ढुल सा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष ने TWEET कर कहा कि इस घटना के पीछे बेरोजगारी और असंतोष है. इस पूरे घटना का सिरे से न नकार कर ऐसा TWEET करना एक तरह से घटना का परोक्ष रूप से सर्मथन कर रहा है.ऐसा ज्ञात हो रहा है.
नफरत की राजनीति से छद्म सफलता प्राप्त किया जा सकता है.लेकिन इसके आगे जहां और भी

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