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किसान आंदोलन या चुनावी स्टंट..... देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इनदिनों किसान की गवाह बन रही है।एक के बाद एक आंदोलन किसानों की दुर्दशा को लेकर हो रहे हैं।समूचे देश में व्यवस्था के सामांतर किसानों को खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। किसी के जीवन में सात दशक कम नहीं होते।चाहे वो व्यक्ति हो या फिर राष्ट्र।पिछले सात दशकों से देश में किसानों की समस्या बदस्तुर जारी है।उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए समय-समय प्रयास भी किये जाते रहे हैं।जब किसानों की समस्या के समाधान को लेकर स्वामीनाथन आयोग बनीं तो लगा कि अब कुछ अच्छा होगा।लेकिन अभी तक उनके सिफारिशों को लागू नहीं हो सकीं है। वामपंथी संगठनों से जुड़े विभिन्न किसान संगठन मार्च निकाल रहे हैं।इस मार्च का नाम किसान मुक्ति मार्च दिया।इस मार्च से जुड़ने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से किसान सगंठनों से जुड़े लोग आए।सब विरोध भी अलग-अलग तरीके से कर रहे हैं।अबकी बार इस विरोध का नेतृत्व स्वराज इंडिया के योगेन्द्र यादव औऱ जय किसान आंदोलन के नेता आविक साहा कर रहे हैं। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले किया जा रहा है। करीब...
इन दिनों एक बार फिर से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह चर्चा के केन्द्र में है।इस चर्चा की ठोस वजह भी है।ऐसा लग रहा है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी जब भी कही जाएगी तो द्वीप समूह के बिना हमेशा अधूरी ही रहेगी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का आपस में गहरा संबंध है। अपनी स्वतंत्रता सबको प्यारी होती है।महानगरों में रहनेवाले तथाकथित सभ्य नागरिक हो या जंगलों में रहनेवाले आदिवासी आदिम।अपने क्षेत्र में कोई भी अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं करता।शायद इतनी समझ सभी को होती है।और ऐसा ही एक बार फिर अंडमान- निकोबार में देखने को मिला। जब एक विदेशी के द्वारा स्थानीय वासिंदो के अस्मिता का अतिक्रमण करने की कोशिश की गई। निकोबार के सेंटिनल द्वीप में अमेरिकी पर्यटक का जबरन प्रवेश स्थानीय लोगों की स्वतंत्रता का अतिक्रमण था। स्थानीय मछुआरों की मदद से 27 वर्षीय अमेरिकी पर्यटक जॉन एलेन चाऊ इसके प्रतिबंधित इलाके में जा घूसा था। इसके बाद उस अमेरिकी पर्यटक पर अपने परंपरागत हथियारों से आदिवासियों ने हमला कर दिया।इस हमले में चाऊ को अपनी जान से हाथ धोना पड...

जाति की गाड़ी और सुशासन का पहिया.....

जाति की गाड़ी और सुशासन का पहिया..... आजादी के इतने सालों के बाद भी व्यवस्था लाख दावे करें लेकिन वह जाति व्यवस्था को कमजोर नहीं कर सकी हैं।अगर दूसरे शब्दों में कहा जाये तो व्यवस्था ही जाति आधारित राजनीति की अप्रत्यक्ष रूप से पोषक है।समय के साथ यह व्यवस्था धीरे-धीरे विघटनकारी होता जा रहा है। दुर्भाग्य से यह देश के कई राज्यों में अपनी पैर जमा चुका है।बिहार भी उन राज्यों में से एक है।बिहार की राजनीति में जाति-व्यवस्था इतना घूलमिल गया है कि कोई भी नीति और रणनीति जाति और वर्ग को ध्यान में रख कर बनाया जाने लगा है। इस राजनीति के पुरोधा बनके उभरे हैं-सुशासन बाबू ।पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने पिछड़ा वर्ग के अंदर अतिपिछड़ा और दलित वर्ग के अंदर महादलित वर्ग बना डाला। शासन का बागडोर जो उनके हाथों में है।इसलिए सशक्तिकरण के नाम पर चाबूक चला रहे हैं।सबका समय आता है अभी इनके सितारे बुलंद है।इसलिए जीन निकल रहे हैं।जब समय लदेगा तब जाएंगे तिहाड़ में बिहार करने के लिए। इस दौर में एक कड़ी और जुड़ गया है। स्थिति यह है कि आर्थिक सशक्तिकरण के नाम पर वर्ग-विशेष को ध्यान में रख कार्यक्रम बनाया गया है।अभी ह...

देख तमाशा देख

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आदेश पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने उन पर कातिलाना हमला किया।  धक्का दिया ताकि वे स्टेज की सीढ़ियों से गिर जाए और मर जाए। तिवारी ने कहा कि मेरी इच्छा स्टेज पर जाने की नहीं थी, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुके देने की थीं। उन्हें सिर्फ यह बताना था कि दूसरे के काम का फीता काटने में कितना मजा आता है।  लेकिन उनके सह पर विधायक अमानतुल्ला ने आते ही गाली-गलोज शुरू कर दी और हमला किया। यह बेहद शर्मनाक है। तिवारी ने यह भी कहा कि स्टेज पर अमानुतुल्ला ने अपशब्द बोले, मेरे तरफ से कोई जवाब नहीं दिए जाने पर वह वापस गए और स्टेज पर मौजूद लोगों के साथ सलाह-मशवरा कर अचानक आए और धक्का देने लगे
शुरु से ही बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों का बोलवाला रहा है।लग रहा है कि यह परंपरा एक कदम और बढ़ने वाला है।बिहार NDA के घटक दलों के बीच 2019 जीतने को लेकर फॉर्मूला तय हो गया है।बीजेपी और जदयू 16-16 सीटों पर जबकि सहयोगी पार्टीयां लोजपा 6 और रालोसपा 2 सीटों पर लड़ेंगी 2019 का चुनावी दंगल। हालांकि 2014 के मुकाबले 2019 का चुनाव जीतना NDA के लिए आसान नहीं होगा। नेताबिहीन विपक्ष थोड़े समय के लिए हमलावर होकर असहज हो जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण बिहार में फिलहाल नीतीश के कद के बराबर कोई दूसरा नेता नहीं।बिहार को विकास के पटरी पर लाने के बाद समाज सुधार के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किये हैं।दहेजबंदी और शराबबंदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।शराबबंदी से एक नए शराबमाफिया वर्ग का उदय हुआ है। लेकिन समाज के निचले पैदान पर रहने वाले लोगों के घरों में आर्थिक खुशहाली आई है।बिहारवासियों को जगंलराज्य की भयावता से ऊबर में लंबा समय लगेगा।जमीनीस्तर पर बिहार की जनता मानती है कि जबतक बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहेंगे तबतक बिहार में बहार रहेगा।
बिहार की राजनीति में सबकुछ सामान्य होता नहीं दिख रहा।एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर घमासान जारी है। कोई भी दल छोटे भाई की भूमिका निभाना नहीं चाह रहा।आने-वाले समय में इसकी कीमत बिहार की जनता को ही चुकानी पड़ेगी।हालांकि जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कहा है कि एनडीए में सीटों का बंटवारा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस बात की घोषणा एनडीए के बड़े नेता करेंगे। एनडीए में नीतीश की वापसी से रालोसपा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा कई बार अपने इस दर्द को व्यक्त भी कर चुके है। रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए को कुछ समय पहले नजर झुका कर सीना भी दिखा चुके हैं।लेकिन कोई भाव नहीं दिए जाने से थोड़े नरम पड़े है।और उपयुक्त मौके की ताक में है कि कब उनका सियासी खीर अपना रंग दिखाए। इधर मीडिया में सीट बंटवारे की अटकलों को लेकर लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सिरे से नकार दिया है।औऱ कहा है कि सीटों के बंटवारे पर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।लेकिन मीडिया में सीटों का बंटवारा भी हो चुका है,यह उनकी समझ से पड़े है।यह आने वाला समय ही त...

बिहार की सियासत में नीतीश- सुशील मोदी की जोड़ी

बिहार की सियासत में नीतीश- सुशील मोदी की जोड़ी फ्लिमी किरदार जय-वीरू से कम नहीं।छात्र राजनीति से उपजे दोनों नेता ने आपसी समन्वय से बिहार में विकास का राजमार्ग दुरूसत किया है।एक समय देश में बिहार को लेकर अलग-अलग धारणा थी।कोई बिहार को बिमारू राज्य बोलता था।जबकि बिहार को जंगल राज्य की संज्ञा देने वालों की भी कोई कमी नहीं थी। लेकिन नीतीश-मोदी की जोड़ी ने इस मिथक को तोड़ा।औऱ साबित कर दिखाया कि बिहार भी विकास की पटरी पर तेज दौड़ सकता है।आज बिहार तेजी से विकास करने वाले राज्यों में शुमार है।आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बिहार ने अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल किया है।सड़कें दो से चार और चार से छह लेन की बन रही हैं। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है। IIT,IIIT,IIM,NIFT सहित केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं।नि : संदेह आज राष्ट्रीय राजनीति परिदृश्य में नीतीश- मोदी की जोड़ी समाजवादी विचारधारा के प्रतिबिंब बनके उभरे हैं।